बच्चो के लिए मोबाइल फ़ोन के फायदे और नुकसान (Advantages and disadvantages of mobile phones for children)
बच्चों में मोबाइल का अत्यधिक उपयोग से कई नुकसान हो सकते हैं या हो रहे है , जिनमें आँखों और दिमागी सेहत पर नकारात्मक प्रभाव, नींद की समस्या, चिड़चिड़ापन, और सामाजिक-बौद्धिक विकास में बाधा भी शामिल है। यह बच्चों की एकाग्रता को कम करता है और उनके शैक्षिक प्रदर्शन को भी प्रभावित कर रहा है।
आँखों पर असर:-
मोबाइल स्क्रीन की ब्लू लाइट और रेडिएशन से
आँखों में जलन, पानी आना और धुंधला दिखाई देना जैसी समस्याएं पैदा
होती हैं।
बचपन से ज़्यादा इस्तेमाल से भविष्य में चश्मा
लगने की संभावना बढ़ जाती है।
लंबे समय तक मोबाइल देखने से बच्चों में
मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) हो सकता है।
बच्चों का ध्यान और एकाग्रता कम हो जाती है,
जि;-ससे
पढ़ाई और अन्य गतिविधियों में उनका प्रदर्शन गिरता जाता है।
अत्यधिक मोबाइल के उपयोग से बच्चे चिड़चिड़े,
गुस्सैल
और अशांत हो सकते हैं।
अत्यधिक मोबाइल के उपयोग बच्चों के
संज्ञानात्मक, सामाजिक और भाषाई कौशल के विकास को बाधित करता
है।
मोबाइल की लत जुए या शराब जैसी लत के समान
हानिकारक हो सकती है। इससे बड़े होने पर मोटापा, अवसाद
(डिप्रेशन) और चिंता (एंग्जायटी) जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
नींद की समस्या :-
देर रात तक मोबाइल देखने से नींद पूरी नहीं हो
पाती है क्योंकि मोबाइल की ब्लू लाइट नींद को नियंत्रित करने वाले मेलाटोनिन
हार्मोन को प्रभावित करती है।
नींद पूरी न होने के कारण बच्चे दिनभर थका हुआ
और कम ऊर्जावान महसूस करते हैं।
सामाजिक और व्यवहार संबंधी नुकसान :-
बच्चों का परिवार और दोस्तों से बातचीत कम हो
जाती है और वे अकेलेपन का शिकार हो सकते हैं।
व्यक्तिगत बातचीत की कमी के कारण उनके सामाजिक
कौशल का विकास रुक सकता है।
ऑनलाइन गेम खेलने वाले बच्चों में हिंसक
व्यवहार सामान्य लगने लगता है और उनका स्वभाव आक्रामक हो सकता है।
बच्चों के लिए मोबाइल फोन के क्या नुकसान हैं :-
मोबाइल फ़ोन का अत्यधिक उपयोग बच्चों के
संज्ञानात्मक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। स्क्रीन पर ज़्यादा समय
बिताने से उनकी अन्वेषण क्षमता, रचनात्मकता और समस्या-समाधान के अवसर
सीमित हो सकते हैं। यह उनकी कल्पनाशील खेलों में शामिल होने की क्षमता को भी बाधित
करता है, जो उनके मस्तिष्क के विकास के लिए महत्वपूर्ण है
मोबाइल फोन के नुकसान
इस प्रकार हैं:-
आँखों पर तनाव और नींद की समस्याएँ, ध्यान
और एकाग्रता में कमी, गर्दन और पीठ दर्द, सामाजिक अलगाव,
साइबर
सुरक्षा और गोपनीयता के खतरे, समय की बर्बादी, खराब शारीरिक
मुद्रा, वित्तीय खर्च, और स्वास्थ्य संबंधी अन्य समस्याएं I
मोबाइल की लत के कई और नुकसान भी हैं, जिनमें
मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव शामिल हैं। इसके कारण चिंता,
अवसाद
और नींद संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, साथ ही आंखों में तनाव, खराब
मुद्रा और एकाग्रता में कमी जैसी शारीरिक समस्याएं भी हो सकती हैं। इसके अलावा,
यह
रिश्तों को खराब कर सकती है और उत्पादकता को कम कर सकती है I
बच्चों को मोबाइल से दूर रखने के लिए, उन्हें
रचनात्मक और शारीरिक गतिविधियों में शामिल करें, जैसे कि कला,
खेलकूद,
या
बाहर की सैर। माता-पिता को खुद भी मोबाइल का इस्तेमाल कम करना चाहिए और बच्चों के
साथ अधिक समय बिताना चाहिए, जैसे कि बातचीत करके या साथ में टीवी
देखकर। मोबाइल के लिए समय सीमा तय करें और सोने से कुछ घंटे पहले से ही बच्चों का
स्क्रीन टाइम बंद कर दें।
बच्चे को व्यस्त रखने के तरीके
पेंटिंग, संगीत, डांस,
या
क्राफ्ट बनाने जैसी क्रिएटिव एक्टिविटीज में बच्चों को शामिल करें।
उन्हें बाहर खेलने, दौड़ने और अन्य
फिजिकल एक्टिविटीज जैसे स्पोर्ट्स, स्विमिंग, या साइकलिंग में
शामिल करें।
साथ में बोर्ड गेम खेलें, कहानियाँ
सुनाएँ, या बाहर पिकनिक पर जाएँ।
सोते समय फोन कितनी दूरी पर होना चाहिए?
एक रिपोर्ट के अनुसार, सोते समय मोबाइल
को 3 फीट की दूरी पर रखना चाहिए। इससे मोबाइल से निकलने वाली रेडिएशन शरीर तक नहीं
पहुंच पाती है I
मोबाइल चलाने की आदत कैसे छोड़े?
मोबाइल की लत छुड़ाने के लिए, अपना
स्क्रीन टाइम सीमित करें, सूचनाएं (नोटिफिकेशन्स) बंद करें,
और
सोशल मीडिया ऐप कम करें या हटाएं। फोन को शारीरिक रूप से दूर रखें, खासकर
सोने के समय। इसके अलावा, माइंडफुलनेस का अभ्यास करें और बोरियत
दूर करने के लिए शारीरिक गतिविधियाँ, नई हॉबी या परिवार के साथ ज्यादा समय बिताएं I
माता-पिता के लिए सुझाव :-
अगर आप खुद लगातार मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं,
तो
बच्चा भी वही करेगा। इसलिए, खुद को भी मोबाइल से दूर रखें। बच्चों
के लिए मोबाइल इस्तेमाल करने का समय तय करें और उसका पालन करवाएं। रात में सोने से
पहले स्क्रीन टाइम बिल्कुल बंद कर दें। बच्चों से बात करें, उनके साथ खेलें
और उन्हें महसूस कराएं कि आप उनसे प्यार करते हैं। इससे वे मोबाइल से ज्यादा आपसे
जुड़ेंगे। धैर्य रखें बच्चों की लत धीरे-धीरे छूटेगी। उन पर चिल्लाने या डांटने के
बजाय, समझदारी से काम लें। जब बात गंभीर हो यदि आपको लगे कि बच्चा बहुत ज्यादा
एडिक्टेड हो गया है और समस्या गंभीर है, तो किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या
काउंसलर से मदद लें।
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