जय देव कमरुनाग (Jai Dev Kamrunag)

देव कमरुनाग की कहानी महाभारत काल के समय से जुड़ी है, जिसके अनुसार वे राजा यक्ष थे और पांडवों ने उनकी पूजा की थी और कमरुनाग झील में भक्तों द्वारा मनोकामना पूरी होने पर सोना, चांदी व सिक्के चढ़ाए जाते हैं और यह माना जाता है कि झील में अरबों की संपत्ति है। लोग झील से चोरी करने से डरते हैं क्योंकि कमरुनाग बुरे इरादों वाले लोगों को दंड देते हैं और स्वयं इस झील की रक्षा करते हैं।

पांडवों से सम्बन्ध:-

मान्यता है कि कमरुनाग महाभारत काल के राजा यक्ष थे, जिनकी पांडवों ने पूजा की थी।

मनोकामना पूर्ति:-

भक्तों का मानना है कि देव कमरुनाग उनकी इच्छाएं पूरी करते हैं जेसे पुत्र प्राप्ति व और भी कई मनोकामनाएं पूरी करते है।

झील में चढ़ावा:-

मनोकामना पूरी होने पर भक्त झील में सोना, चांदी और सिक्के चढ़ाते हैं, जिनकी कुल मात्रा का अनुमान लगाना संभव नहीं है।

रहस्यमयी झील:-

कमरुनाग झील के बारे में कई लोक कथाएं हैं, जिनमें से एक यह है कि यह पाताल लोक तक जाती है और इसमें देवताओं का खजाना छिपा है।



मंदिर का इतिहास:-

वर्तमान मंदिर का निर्माण 14वीं शताब्दी में मंडी के राजा ने करवाया था, जबकि मूल मंदिर झील में डूबा हुआ था और उसकी स्थापना पांडवों ने की थी।

स्थान:-

कमरुनाग मंदिर हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में समुद्र तल से 3,334 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और बाया चैल चौक शाल्ला होते हुए खुंडे से लगभग 1 किलोमीटर पैदल दुरी पर है तथा बाया रोहांडा  से लगभग 6 किलोमीटर की पैदल दूरी पर है।

कमरुनाग मंदिर का इतिहास और महत्व:-

महाभारत काल से सम्बन्ध:-

पौराणिक कथाओं के अनुसार, कमरुनाग महाभारत के राजा यक्ष थे, जिनकी पांडवों ने पूजा की थी। यह भी माना जाता है कि वह महात्मा बर्बरीक थे, जो भीम के पोते और घटोत्कच के पुत्र थे।

मूल मंदिर और वर्तमान संरचना:-

माना जाता है कि मूल मंदिर कमरुनाग झील में समा गया था। वर्तमान मंदिर का निर्माण 14वीं शताब्दी में मंडी के राजा द्वारा करवाया गया था और समय के साथ इसमें कई सुधार किए गए।

झील का रहस्य:-

मंदिर के सामने एक झील है, जिसमें भक्तों द्वारा अपनी मनोकामनाओं के बदले सोना, चांदी और सिक्के चढ़ाए जाते हैं। यह माना जाता है कि इस झील में एक विशाल खजाना है, और देवता स्वयं इसकी रक्षा करते हैं।

वर्षा के देवता:-

मंडी के लोग कमरुनाग को "वर्षा के देवता" मानते हैं। और ये मंडी जनपद के सबसे बड़े देवता भी है I

मेला:

हर साल जून महीने में कमरुनाग झील में एक बड़ा मेला लगता है। श्रद्धालु अपनी यात्रा खुंडा से कमरुनाग तक पैदल मार्ग द्वरा करते है

 


कमरुनाग की कहानी क्या है?

प्राचीन लोककथाओं के अनुसार, कमरुनाग महाभारत काल के एक शक्तिशाली योद्धा थे। पांडवों में से एक भीम के साथ युद्ध के बाद, कमरुनाग भगवान कृष्ण की बुद्धिमत्ता से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने हिमालय के संरक्षक देवता बनने का निर्णय लिया I

कमरुनाग झील का रहस्या:-

कमरुनाग झील का रहस्य यह है कि इसमें अरबों रुपये का खजाना छिपा है, जो भक्तों द्वारा चढ़ाई गई सोने, चांदी अनमोल रत्न जमा है। इस खजाने की रक्षा स्वयं कमरुनाग देवता करते हैं, और माना जाता है कि जो भी इसे चुराने की कोशिश करता है, उसकी जान चली जाती है। झील का संबंध महाभारत काल से है I

असाधारण घटना:-

एक व्यक्ति ने खजाना चुराने की कोशिश में झील का पानी निकालने का प्रयास किया, जिसमें उसकी जान चली गई, जिससे देवता की अलौकिक शक्ति का पता चलता है।

 

कैसे पहुंचें:

हवाई यात्रा द्वारा:-

निकत्तम एयरपोर्ट लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर भुंतर जिला कुल्लू, हिमाचल प्रदेश में स्थित है |

ट्रेन द्वारा:-

निकत्तम रेल संपर्क जोगिन्दर नगर, जिला मंडी हिमाचल प्रदेश में लगभग 101 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है |

सड़क के द्वारा:-

कामरुनाग झील पर मंडी से बाया चैल चौक सड़क मार्ग से 50 किमी दूर हैI

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